अकोला के अदबी और तालीमी हल्क़ों में ग़म की लहर

प्रा. डॉ. मोहम्मद रागीब देशमुख
अकोला : शहर के साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र के लिए अत्यंत दुखद समाचार है। महानगरपालिका के वरिष्ठ शिक्षक, वेस्ट अकोला स्थित आठ नंबर स्कूल के पूर्व प्रधानाध्यापक तथा प्रख्यात शायर साजिद अख्तर महशर अंसारी का आज आकस्मिक निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से पूरे शहर में ग़म की लहर फैल गई है। साजिद अख्तर महशर अंसारी का जन्म 1 जुलाई 1969 को अकोला में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा और साहित्य को समर्पित किया। अकोला महानगरपालिका के विभिन्न स्कूलों में उन्होंने वर्षों तक एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और प्रेरणादायी शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। विद्यार्थियों के बौद्धिक और नैतिक विकास के लिए वे सदैव प्रयासरत रहे और एक सशक्त शिक्षक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। शिक्षा के साथ-साथ वे उर्दू साहित्य के एक संवेदनशील और लोकप्रिय शायर थे। उनकी शायरी में इंसानियत, सामाजिक सरोकार, जीवन की सच्चाइयों और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिलती थी। उनके अशआर सीधे दिल को छू जाते थे और श्रोताओं पर गहरा प्रभाव छोड़ते थे। शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में होने वाले मुशायरों और साहित्यिक मंचों पर उनकी मौजूदगी विशेष आकर्षण का केंद्र रहती थी। साजिद महशर की शख्सियत बेहद सादा, मिलनसार और विनम्र थी। शिक्षक के रूप में वे विद्यार्थियों के प्रिय थे और शायर के रूप में साहित्यप्रेमियों के बीच सम्मानित। उन्होंने न केवल उर्दू साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि नई पीढ़ी को शिक्षा और अदब के प्रति जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से अकोला के शिक्षा विभाग को जहां एक अनुभवी और समर्पित शिक्षक की कमी खलेगी, वहीं उर्दू साहित्य जगत को भी एक सशक्त आवाज़ हमेशा के लिए खोनी पड़ी है। इस क्षति को अपूरणीय बताया जा रहा है। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यप्रेमियों और शुभचिंतकों में गहरा ग़म व्याप्त है। शहर की अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और साहित्यिक संस्थाओं ने ग़म संदेश जारी कर उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। कई साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने मरहूम को खिराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि साजिद महशर का इल्म-ओ-अदब के मैदान में दिया गया ख़िदमती और फ़िक्री योगदान तवारीख़ के सफ़हात में हमेशा ज़िंदा रहेगा। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता करे। आमीन। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी रूह को सुकून अता करे और उनके अहले-ख़ाना को इस बड़े सदमे को सब्र और हिम्मत के साथ बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।


