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मुंबई में नर्देश एफ़ी का शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” की तक़रीब-ए-इजरा 25 दिसंबर को

मुंबई में नर्देश एफ़ी का शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” की तक़रीब-ए-इजरा 25 दिसंबर को

मुमताज़ अदबी व इल्मी शख़्सियतों की शिरकत मुतवक़्क़े

प्रा. डॉ. मोहम्मद रागीब देशमुख

मुंबई, 23 दिसंबर उर्दू अदब के संजीदा और फ़िक्री हल्क़ों में एक अहम अदबी सरगर्मी के तौर पर मारूफ़ शायर नर्देश एफ़ी के ताज़ा शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” की बक़ायदा तक़रीब-ए-इजरा बरोज़ जुमेरात, 25 दिसंबर 2025, शाम 4 बजे मुनक़इद होने जा रही है। यह तक़रीब कॉन्फ़्रेंस हॉल, इस्लाम जिमख़ाना, मरीन लाइंस, मुंबई में होगी, जिसमें शहर-ए-मुंबई की मुतअद्दिद मुमताज़ अदबी, तनक़ीदी और इल्मी शख़्सियतों की शिरकत मुतवक़्क़े है और अदबी हल्क़ों में इस तक़रीब को ख़ास अहमियत हासिल हो रही है। इस बावक़ार अदबी तक़रीब की सदरात मारूफ़ मुहक़्क़िक़ व दानिशवर डॉ. इजाज़ फ़ातिमा पाटनकर फ़रमाएँगी, जबकि शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” का इजरा बदस्त डॉ. प्रिंसिपल मोहम्मद सोहेल लोखंडवाला किया जाएगा। प्रोग्राम की निज़ामत मारूफ़ अदबी शख़्सियत फ़ारूक़ सैयद करेंगे, जो अदबी हल्क़ों में अपने मुनज़्ज़म, संजीदा और बावक़ार उस्लूब के लिए जाने जाते हैं और जिनकी निज़ामत इस अदबी नशिस्त को एक बाक़ायदा और फ़िक्री जहत अता करेगी। तक़रीब में मेहमान-ए-ख़ुसूसी के तौर पर एडवोकेट यूसुफ़ इब्राहानी शरीक होंगे, जो शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” के फ़िक्री, समाजी और अस्री तनाज़ुर पर इज़हार-ए-ख़याल करेंगे और शायर नर्देश एफ़ी की तख़लीक़ी जहात, फ़िक्री बसीरत और अस्र-ए-हाज़िर के मसाइल से उनके शायरी रिश्ते पर रोशनी डालेंगे, जिससे सामईन को इस मजमूआ के फ़िक्री पस-ए-मंज़र को समझने में मदद मिलेगी। इस अदबी नशिस्त में ख़ुसूसी शिरकत करने वालों में डॉ. मोहम्मद अली पाटनकर, सरफ़राज़ आरज़ू, निज़ामुद्दीन राएन, डॉ. अलाउद्दीन शेख़, डॉ. प्रिंसिपल मोहम्मद असलम शेख़, मुशीर अहमद अंसारी और डॉ. ख़ालिद शेख़ शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी से इस अदबी प्रोग्राम की इल्मी, फ़िक्री और तनक़ीदी अहमियत में नुमायाँ इज़ाफ़ा मुतवक़्क़े है, जबकि शहर-ए-मुंबई की दीगर अहम अदबी व साक़ाफ़ती शख़्सियतों की शिरकत भी मुतवक़्क़े बताई जा रही है, जिससे यह तक़रीब एक जामेअ अदबी इज्तिमाअ की सूरत इख़्तियार कर लेगी। इस मौक़े पर शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” के इफ्तिताही कलिमात मशहूर व मारूफ़ शायरा और शायर नर्देश एफ़ी की वालिदा लता हया पेश करेंगी, जो इस तक़रीब को न सिर्फ़ अदबी बल्कि जज़्बाती एतिबार से भी एक ख़ुसूसी वक़ार अता करेंगे और शायर की अदबी तश्कील और फ़िक्री तरबियत के हवाले से अहम नुक़ात पर रोशनी डालेंगी। इस शायरी मजमूआ की इशाअत और अदबी तआरुफ़ के ज़िम्न में डॉ. क़ासिम इमाम, हामिद इक़बाल सिद्दीकी, क़मर सिद्दीकी और यूसुफ़ दीवान भी इज़हार-ए-ख़याल करेंगे, जो शायरी मजमूआ “दुनिया अज़ाब में” के मौज़ूआत, फ़न्नी उस्लूब, शायरी इज़हार और अस्र-ए-हाज़िर से इसकी मअनवी वाबस्तगी पर तफ़सीली गुफ़्तगू करते हुए इस बात को वाज़ेह करेंगे कि यह मजमूआ मौजूदा समाजी हालात, इंसानी इज़्तिराब और फ़िक्री कर्ब की भरपूर अक़्क़ासी करता है। अदबी हल्क़ों के मुताबिक़ “दुनिया अज़ाब में” शायर नर्देश एफ़ी की फ़िक्री हस्सासियत, समाजी शऊर और अस्री कर्ब का जामेअ और मोअस्सिर इज़हार है, जिसमें मौजूदा अहद के इंसान के मसाइल, बेचैनी, इज़्तिराब और दख़िली कशमकश की गूँज नुमायाँ तौर पर सुनाई देती है। इसी वजह से इस मजमूआ के इजरा को अदबी दुनिया में ख़ासी दिलचस्पी और तजस्सुस के साथ देखा जा रहा है और इस तक़रीब को एक अहम अदबी वाक़िआ क़रार दिया जा रहा है। इस तक़रीब का एहतमाम लता हया फ़ाउंडेशन और इस्लाम जिमख़ाना, मुंबई की जानिब से किया जा रहा है और मुन्तज़िमीन के मुताबिक़ इस प्रोग्राम का बुनियादी मक़सद उर्दू अदब में संजीदा शायरी मुकालमे को फ़रोग़ देना, नए और मयारी अदबी कामों को क़ारईन और नाक़िदीन के सामने लाना और अदब-दोस्त हल्क़ों को एक फ़िक्री और तख़लीक़ी प्लेटफ़ॉर्म फ़राहम करना है, ताकि उर्दू ज़बान व अदब की रवायत को नई तवानाई और सिम्त मयस्सर आ सके। लता हया ने इस मौक़े पर शहर-ए-मुंबई के तमाम उर्दू-दोस्तों, संजीदा क़ारईन, अदीबों, शायरों और अदब से वाबस्ता अफ़राद से पुरज़ोर अपील की है कि वे इस इल्मी व अदबी जश्न में भरपूर शिरकत करें, शायर की तख़लीक़ी काविश की हौसला-अफ़ज़ाई करें और उर्दू अदब के फ़रोग़ में अपना फ़आल किरदार अदा करें, ताकि इस तरह की अदबी सरगर्मियाँ मुस्तक़बिल में भी तसल्सुल के साथ मुनक़इद होती रहें।

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